Monday, 5 June 2017

3 जून 1995 सामाजिक परिवर्तन दिवस.........

1984 में बसपा का निर्माण होने के बाद से ही बसपा को मिशन कहकर सम्बोधित किया जाता रहा हैं जिसको हर कार्यकर्ता अपने जीवन का उद्देश्य समझ कर आगे बढाया। यह सामान्य अर्थो में राजनीतिक पार्टी कम सामाजिक परिवर्तन व् आर्थिक मुक्ति का साधन अधिक माना गया । जो भी बसपा से जुड़ा बहुजन आंदोलन का क्रांतिकारी वाहक बन गया। साहस समझ शक्ति के अदभुत प्रतिक के रूप ने बसपा ने सदिय से दबे कुचले बहुजन समाज और खास तौर से भारत के अछूत वर्गो में जबरदस्त क्षमता व् ऊर्जा का संचार किया। उनकी सदियोँ से दबी हुई सांगठनिक और सामाजिक परिवर्तन की चेतना को यथार्थ के पंख लगा दिए। एक जबरदस्त बदलाव की आंधी चली और एक एक कर के मनुवादी संस्थाये व् उनका वर्चस्व ध्वस्त होता गया । बाबा साहब, जोतिबा फुले, साहूजी महाराज ,पेरियार, नारायणा गुरु जैसे क्रांतिकारियो को राष्ट्रीय पहचान व् मान्यता मिली। भारत का इतिहास व् राजनीति हमेशा के लिए बदल चुकी थी। बहुजन नायक कांशीराम एक महान सामाजिक परिवर्तक व् राजनीती के बेजोड़ खिलाड़ी के रूप में स्थापित हो गये। बसपा के पहले दस साल बहुजन समाज के लिए किसी हसीन सपने से कम न थे। लेकिन 3 जून 1995 को इन सपनों को अमली जामा पहना दिया गया और बहुजन समाज की शेरनी बहन मायावती देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री बनी। यह पिछ्ले डेढ़ हजार साल की विलक्षण घटना थी जब बौद्ध समाज ने राजसत्ता को पुनः अपने हाथो में लिया। पुरे देश में ख़ुशी व् उत्सव का माहोल था बहुजन समाज अब कभी न मुड़कर देखने के लिए अपनी ऐतिहासिक मंजिल की तरफ कदम बढ़ा चुका था। यह पुरे देश के लिए गौरव व् सम्मान का अवसर था। बाबा साहेब ने 29 नवम्बर 1949 को नानकचन्द रट्टू से जो कहा था अब रानी के पेट से नही बल्कि बैलट बॉक्स से शासक पैदा होंगे और महलो वाले सड़को पर व् सड़को वाले महलो में नजर आयेंगे। 3 जून 1995 को यह सही सिद्ध हुआ जब एक चमार महिला ने सभी जातिवादी मनुवादिओ के मंसूबो को कांशीराम जी के नेतृत्व में नेस्तनाबूद करते हुए पुरे बहुजन समाज को सम्मान के शिखर पर पहुँचा दिया। पुरे देश में सामाजिक परिवर्तन की बयार चलने लगी। शिवाजी का तिलक अपने उलटे पॉँव की अंगुली से करने वाले दुर्बुद्धि बहन जी के पैरो की धूल अपने माथे पर लगाकर अपने जीवन को सफल बनाने के लिए दण्डवत हुए जाते थे। मानो लोकतान्त्रिक संविधान अपना पहला उत्सव मना रहा था। इसके बाद तीन बार और बसपा ने बहनजी के नेतृत्त्व में उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार बना कर सदी से चले आ रहे सामाजिक गुलामी के दुष्चक्र को तोड़ दिया। आज जो आंदोलन बहुजन समाज को सम्मान दिलाने के लिए शुरू हुआ था केंद्र में बहनजी के नेतृत्व में सरकार बना कर उसको इसकी तार्किक मंजिल तक पहुचना चाहता हैं। सही मायनो में 3 जून सामाजिक परिवर्तन दिवस हैं।

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