Wednesday, 7 June 2017

आधुनिक भारत का #जलियांवाला_बाग मध्यप्रदेश के #मंदसौर में : फायरिंग में 6 की मौत


भारत मे किसानों को फसलो का नही,लाशों का मुआवज़ा मिलता है?
इंदौर.मध्य प्रदेश में जारी किसान आंदोलन में हिंसा का दौर थम नहीं रहा है। मंगलवार को मंदसौर में आंदोलनकारियों ने 8 ट्रक और 2 बाइक को आग के हवाले कर दिया। पुलिस और सीआरपीएफ पर पथराव भी किया। हालत पर काबू पाने के लिए सीआरपीएफ की फायरिंग में 6 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया। ये साफ नहीं है कि किसकी फायरिंग में इन किसानों की मौत हुई। एमपी के होम मिनिस्टर भूपेंद्र सिंह ने कहा कि पुलिस या सीआरपीएफ की तरफ से कोई फायरिंग नहीं हुई। वहीं, राहुल गांधी ने कहा कि सरकार देश के किसानों के साथ जंग लड़ रही है। बता दें कि किसान कर्ज माफी समेत कई मांगें कर रहे हैं। एक धड़े का सरकार से समझौता हो चुका है। इसके बावजूद हिंसा जारी है। कहां और कैसे भड़की हिंसा...
भाजपा सरकार में किसानों की आत्महत्या में 43% बढ़ोतरी हुई
- मंगलवार को मंदसौर-नीमच रोड पर करीब एक हजार किसानों ने चक्काजाम कर दिया। यहीं से हिंसा भड़की। इसके बाद 8 ट्रकों और 2 बाइकों में आग लगा दी। पुलिस और सीआरपीएफ ने हालात संभालने की कोशिश की। लेकिन, भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद फायरिंग हुई। फायरिंग किसने की, ये साफ नहीं है।
- मारे गए लोगों के नाम कन्हैयालाल पाटीदार निवासी चिलोद पिपलिया, बंटी पाटीदार निवासी टकरावद, चैनाराम पाटीदार निवासी नयाखेडा, अभिषेक पाटीदार बरखेडापंथ और सत्यनारायण पाटीदार बरखेडापंथ हैं। मंदसौर में ही घायल आरिफ नाम के शख्स को इंदौर ले जाया जा रहा था। रास्ते में नागदा के पास उसकी मौत हो गई।
- इसके बाद भीड़ ने मंदसौर में गराेठ रोड पर सीतामऊ टोल बूथ पर आग लगा दी। कुल 28 गाड़ियां जलाई जा चुकी हैं।
- मंदसौर में सोमवार से ही इंटरनेट पर रोक लगा दी गई है। फायरिंग के बाद जिला कलेक्टर ने पहले धारा 144 लगाई और इसके बाद कर्फ्यू लगा दिया।
- इस बीच, दिग्विजय सिंह ने कहा है कि किसानों के मुद्दे पर हम मध्य प्रदेश की जनता से सपोर्ट की उम्मीद करते हैं। मध्य प्रदेश में बुधवार को बंद रहेगा।
सीएम ने दिए ज्युडिशियल इन्क्वॉयरी के ऑर्डर
-मंदसौर की घटना पर शिवराजसिंह चौहान ने ज्युडिशियल इन्क्वॉयरी के ऑर्डर दिए हैं। होम मिनिस्टर भूपेंद्र सिंह ने कहा- छह दिन से आंदोलन को उग्र करने की साजिश हो रही है। पुलिस धैर्य से काम ले रही थी। असामाजिक तत्वों से सख्ती से निपटने के ऑर्डर दिए गए हैं।
- सीएम ने मृतकों के परिजनों को 1 करोड़, नौकरी और घायलों को 5 लाख रुपए देने की घोषणा की है।
किसानों की सरकार से क्या मांगें?
- किसान सेना के संयोजक केदार पटेल और जगदीश रावलिया के मुताबिक- किसानों ने मप्र सरकार को 32 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा था। इन पर सोमवार को सीएम से चर्चा हुई थी। उन्होंने इसमें से कुछ मांगे मंजूर कर ली थीं। पटेल के अनुसार की मुख्य मांगे ये हैं-
1) मप्र सरकार ने एक कानून बनाकर किसानों की जमीन लेने के बदले मुआवजे की धारा 34 को हटा दिया था और किसानों के कोर्ट जाने का अधिकार वापस ले लिया था। इस कानून को हटाना किसानों की पहली मांग है।
2) स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएं जिनमें कहा गया है कि किसी फसल पर जितना खर्च आता है, सरकार उसका डेढ़ गुना दाम दिलाए।
3) एक जून से शुरू हुए आंदोलन में जिन किसानों के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस लिया जाए। मप्र के किसानों की कर्जमाफी।
4) सरकारी डेयरी द्वारा दूध खरीदी के दाम बढ़ाए जाएं।
रविवार को शुरू हुई हिंसा
- मध्य प्रदेश का किसान आंदोलन रविवार को ज्यादा हिंसक हो गया था। रतलाम में पथराव से एक एएसआई की आंख फूट गई थी। सीहोर में सीएसपी, दो टीआई समेत 11 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए।
- सोमवार शाम ही उज्जैन में भारतीय किसान संघ के मेंबर्स और शिवराज सिंह चौहान के बीच मीटिंग हुई। इसमें किसानों की कई अहम मांगों को मान लिया गया था। मीटिंग के बाद संघ और किसान सेना ने आंदोलन खत्म करने का एलान किया। हालांकि, देर रात दो अन्य संगठनों किसान यूनियन और किसान मजदूर संघ ने कहा है कि हड़ताल जारी रहेगी। इसके बाद से हिंसा जारी है।

आठ रुपए किलो प्याज, समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदेंगे: सीएम
- उज्जैन में सीएम चौहान ने भारतीय किसान संघ के साथ मीटिंग में एलान किया था कि सरकार किसानों से इस साल 8 रु. किलो प्याज और गर्मी में समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदेगी। खरीदी 30 जून तक चलेगी।
ये घोषणाएं भी की गईं
- मंडी में किसानों को 50% नकद भुगतान तत्काल होगा, बाकी 50% राशि आरटीजीएस के जरिए मिलेगी।
- सब्जी मंडियों को मंडी एक्ट के दायरे में लाया जाएगा।
- फसल बीमा को ऐच्छिक (Facultative) बनाया जाएगा। इससे किसानों को आढ़त नहीं देनी पड़ेगी।
- टाउन एंड विलेज इन्वेस्टमेंट एक्ट के तहत जो भी किसान विरोधी प्राेविजन्स होंगे, उन्हें हटाया जाएगा।
- आंदोलन में किसानों के खिलाफ जो भी पुलिस केस बने हैं, उन्हें खत्म किया जाएगा।

भोपाल/मुंबई. मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में किसानों की हड़ताल को करीब हफ्ताभर हो गया है। इस दौरान दोनों राज्यों में सब्जी के दाम बढ़ गए। दूध की सप्लाई पर असर पड़ा। इस बीच एमपी के मंदसौर में मंगलवार को आंदोलन हिंसक हो गया। फायरिंग और पथराव के दौरान 6 किसानों की मौत हो गई। मध्यप्रदेश में सीएम शिवराज सिंह चौहान ने जहां किसानों से बातचीत के बाद उनकी मुख्य मांगों को मानने की बात कही, वहीं फडणवीस ने 31 अक्टूबर तक कर्जमाफी का एलान किया है। क्यों शुरू हुआ ये आंदोलन, क्या हैं किसानों की मांगें? जानिए आंदोलन से जुड़े 10 प्वाइंट...
1# कैसे शुरू हुआ किसान आंदोलन?
- अप्रैल के महीने में अहमदनगर के पुणतांबा गांव में 22 मार्च को ग्राम सभा ने हड़ताल का फैसला लिया। पुणतांबा की मंडी अहमदनगर और नािसक की सीमा पर बसी सबसे बड़ी मंडी है, जो आसपास के शहरों-कस्बों में दूध, फल और सब्जी सप्लाई करती है। महाराष्ट्र और केंद्र की सरकार ने किसानों से कर्ज माफी का वादा किया,लेकिन वादा पूरा नहीं किया। कई साल से मानसून खराब होने के चलते पैदावार ठीक नहीं हुई, लिहाजा किसानों की माली हालत खराब हो गई। इस साल फसल तो अच्छी हुई, लेकिन किसानों की उसकी कीमत सही नहीं मिली। इस वजह से किसानों ने तय किया कि इस बार वे खरीफ की फसल में वो केवल अपनी जरूरतभर की चीजें ही पैदा करेंगे।
2# कब से हुई शुरुआत?
- महाराष्ट्र में पुणतांबा के किसानों से प्रभावित हो कर छोटे-बड़े किसान संगठन, नेता इकट्ठा हो गए। 1 जून से किसान क्रांति मोर्चा के नाम से आंदोलन शुरू कर दिया गया। पश्चिम महाराष्ट्र के किसानों ने आंदोलन शुरू किया। नासिक और अहमदनगर आंदोलन का केंद्र है।
- मध्यप्रदेश में 2 जून से इस आंदोलन की शुरुआत हुई। यहां इंदौर, धार, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, खंडवा और खरगोन के किसान आंदोलन कर रहे हैं।
3# क्या हैं किसानों की मांगें?
महाराष्ट्र

1) कर्ज माफ किया जाए।
2) प्रोडक्शन कॉस्ट से 50% ज्यादा मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) मिले।
3) 60 साल और उससे ज्यादा उम्र के किसानों के लिए पेंशन स्कीम हो।
4) बिना ब्याज के लोन मिले, दूध का रेट बढ़ाकर 50 रुपए/लीटर िकया जाए।
6) माइक्रो इरीगेशन इक्विपमेंट्स के लिए फुल सब्सिडी मिले।
मध्य प्रदेश
1) किसानों को कर्ज माफी मिले।
2) सरकारी डेयरी दूध के ज्यादा दाम दे।
3) स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें लागू हों।
4) किसानों पर दायर केस वापस लिए जाएं।
4# आंदोलन की क्या है खासियत?
पहली बार...
 दो राज्यों के किसान एकसाथ आंदोलन के लिए सड़कों पर उतर आए हैं।
चेहरा... कोई नहीं है। महाराष्ट्र में आंदोलन किसानों ने शुरू किया। ये विदर्भ या मराठवाड़ा के किसान नहीं हैं, जो सूखे से प्रभावित रहते हैं।
संकट... गेहूं, दाल, चावल उगाने वाले किसानों के अलावा उन पर भी मंडरा रहा है, जो फल-दूध-सब्जी बेचते हैं।
5# दोनों प्रदेशों की कितनी अहमियत?
महाराष्ट्र 
प्याज:
देश में सबसे ज्यादा 29% प्याज यहीं पैदा होता है।
दूध: महाराष्ट्र बड़े दूध उत्पादक राज्यों में गिना जाता है। 2015-16 में यहां 10,153 टन दूध का उत्पादन किया गया।
मध्य प्रदेश
दूध:
 मध्यप्रदेश में 2015-16 में 12148 टन दूध का उत्पादन किया गया।
प्याज: प्याज की पैदावार में मध्यप्रदेश तीसरे नंबर पर है। 2014-15 में भी प्रदेश ने करीब 3 हजार टन प्याज का प्रोडक्शन किया।
6# किसानों ने कैसे विरोध किया?
- सब्जियां, फल सड़कों पर फेंक दिए और दूध सड़कों पर बहा दिया। किसान कृषि उपज को शहरों तक नहीं पहुंचने दे रहे हैं।
7# कहां-कहां हिंसा हुई?
- मध्यप्रदेश के मलावा और निमाड़ में हिंसक आंदोलन। मंदसौर की पिपलियामंडी के पास पुलिस पर पत्थर फेंके और वाहन जला दिए। रेलवे क्रॉसिंग का फाटक तोड़ दिया और पटरियां उखाड़ने की कोशिश की।
8# कितने करोड़ के नुकसान का अंदेशा?
प्याज की सबसे बड़ी मंडी महाराष्ट्र के लासलगांव में ही अब तक 100 करोड़ रुपए के कारोबार का नुकसान हो चुका है।
9# दोनों प्रदेशों की सरकार ने क्या किया?
महाराष्ट्र

- सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि 31 अक्टूबर से पहले परेशान किसान, जिन्हें मदद की जरूरत है.. उनका कर्ज माफ कर दिया जाएगा। ये महाराष्ट्र के इतिहास की सबसे बड़ी कर्जमाफी होगी।
- बता दें कि 5 एकड़ जमीन वाले 1.07 करोड़ किसानों की कर्जमाफी की जा सकती है। इसके लिए सरकार को 30,000 करोड़ रुपए की जरूरत पड़ेगी।
मध्यप्रदेश
- सीएम चौहान ने कहा कि सरकार किसानों से इस साल 8 रु. किलो प्याज और गर्मी में समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदेगी। खरीदी 30 जून तक चलेगी।
- कृषि उपज मिनिमम सपोर्ट प्राइज पर खरीदने के लिए 1000 करोड़ का प्राइज स्टैबिलाइजेशन फंड बनाया जाएगा। मंडी में किसानों को 50% नकद भुगतान तत्काल होगा, बाकी 50% रकम रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) के जरिए मिलेगी।
10# स्वामीनाथन कमेटी ने क्या सिफारिशें की थीं?
- किसी फसल के प्रोडक्शन पर जितना खर्च आ रहा है, सरकार उससे डेढ़ गुना ज्यादा दाम दिलाए।
- सरप्लस और बेकार जमीनों को बांटा जाए।
- एग्रीकल्चर लैंड और जंगलों को नॉन-एग्रीकल्चर यूज के लिए कॉरपोरेट सेक्टर्स को देने पर रोक लगे।
- जंगलों में आदिवासियों और चरवाहों को जाने की इजाजत हो, साथ ही कॉमन रिसोर्स पर जाने की इजाजत भी मिले।
- नेशनल लैंड यूज एडवाइजरी सर्विस का गठन किया जाए, ताकि लैंड यूज का फैसला पर्यावरण-मौसम और मार्केटिंग फैक्टर्स को ध्यान में रखकर हो।
- एग्रीकल्चर लैंड की बिक्री को रेगुलेट करने के लिए मैकनिज्म बनाया जाए, जिसमें जमीन, प्रपोजल और खरीदार की कैटेगरी को ध्यान में रखा जाए।
EXPERT VIEW: सरकार किसानों का दर्द समझे
- एग्रीकल्चर एक्सपर्ट देवेंद्र शर्मा के मुताबिक- मध्‍य प्रदेश और महाराष्‍ट्र में किसानों ने जो आंदोलन शुरू किया है, ये युवा किसानों की तरफ से शुरू किया गया है। इस आंदोलन में पढ़े-लिखे युवाओं की भागीदारी बड़े स्‍तर पर है। इससे जरूर सरकार हिलेगी और किसानों की स्थिति समझेगी।
- शर्मा ने आगे कहा- इस हड़ताल के साथ जो सबसे बड़ी बात है, वो ये है कि इसका कोई बड़ा चेहरा नहीं है। अब किसान अपने बीच के ही व्‍यक्ति के नेतृत्‍व में अपनी बात रख रहे हैं। आंदोलन में हिंसा की बात करें, तो ये किसान नहीं कर रहे। ये कुछ असामाजिक तत्‍वों का काम है और ये सिर्फ किसानों की मांगों से ध्‍यान भटकाने के लिए किया जा रहा है। हिंसा से कोई भी आंदोलन सफल नहीं हो सकता।


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