Thursday, 8 June 2017

EVM की जवाबदेही से भागने का बड़ा खेल, चुनाव आयोग ने कहा मशीनें उनकी हैं ही नहीं

नई दिल्ली। 
ईवीएम को लेकर तमाम सारी शंकाओं और शक के बीच चुनाव आयोग ने ये कहकर सबको हैरान कर दिया कि महाराष्ट्र शहरी निकाय चुनाव में इस्तेमाल की गई ईवीएम मशीन उनकी नहीं है. आयोग ने स्पष्ट करते हुए कहा है कि ‘नगरी निकाय चुनाव में जिन मशीनों का इस्तेमाल महाराष्ट्र चुनाव आयोग ने किया, उनका संबंध राष्ट्रीय चुनाव आयोग से नहीं था।’

जिम्मेदारी से भागने का प्रयाास-
चुनाव आयोग के इस स्पष्टीकरण के बाद राजनीतिक खेमे में खलबली मच गई है. क्योंकि ईवीएम से जुड़ा मुद्दा इस समय अतिसंवेदनशील है. ऐसे ही ईवीएम शक के दायरे में है और जिम्मेदारियों से भागने का या नया खेल और भी ज्यादा शक पैदा करता है.
गोदी मीडिया पर सवाल – 
भारत मुक्ति मोर्चा के सुनील जनार्दन यादव बकायदा ईवीएम के खिलाफ ईवीएम हटाओ लोकतंत्र बचाओ मुहिम चलाए हुए हैं. उनका कहाना है कि देश की चुनाव आयोग प्रक्रिया पर इतनी बड़ी खबर को देश का मीडिया खा गया. किसी ने इतनी बड़ी खबर को मुद्दा बनाने की जहमत ही नहीं उठाई.जबकि ईवीएम से मतदान को लेकर लगातार सभी दल मांग उठा रहे हैं. धन्य है ऐसी मीडिया पर .
सोशल एक्टीविस्ट अरविंद शेष लिखते हैं कि आज दरअसल तूफान और जलजला इस बात पर मच जाना चाहिए था कि महाराष्ट्र के स्थानीय चुनावों में जिन EVM का इस्तेमाल किया गया, उनसे राष्ट्रीय चुनाव आयोग ने पल्ला झाड़ लिया! ईवीएम उसकी नहीं थीं! इससे पहले गुजरात में भी ऐसा हो चुका है! तो वे EVM कहां से लाई गई थीं, वे EVM क्या थीं, उनमें क्या था, उनका मकसद क्या था और हासिल क्या रहा! क्या कोई पर्दे के पीछे से करा रहा है चुनाव..!!!
जो EVM देश की ‘तकदीर’ तय कर रही हैं, उसके बारे में इतनी बड़ी खबर कैसे चर्चा का मुद्दा नहीं बन सकीं, क्यों खबरों से गायब रहीं!
इससे पर जो खबरें चर्चा में रहीं, उनके हासिल का भी एक बार अंदाजा लगा लीजिएगा! तो क्या अचानक पैदा की गई कुछ खबरें EVM की इस भयानक खबर को ही दफ्न करने के लिए गढ़ी गईं, पैदा की गईं..?
जिन खबरों पर आज तूफान मचा, उनका महत्व हो सकता है! लेकिन महाराष्ट्र लोकल चुनावों इस्तेमाल EVM से चुनाव आयोग का पल्ला झाड़ना एक बहुत ज्यादा महत्व की खबर है…
 लगातार  मांग उठा रहे है विपक्षी दल- 
पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के बाद से बीएसपी अध्यक्ष  मायावती, आप संयोजक केजरीवाल,  भारत मुक्ति मोर्चा के सुनील जनार्दन यादव समेत तमाम विपक्षी नेता ईवीएम पर सवाल उठा रहे हैं.
दिल्ली विधानसभा में तो ईवीएम की प्रतिलिपि को हैक करके दिखा भी दिया गया. जिससे ईवीएम की कार्यप्रणाली शक के दायरे में है। ऐसे में अगर यह खबर आती है कि किसी राज्य के शहरी निकाय चुनाव में इस्तेमाल की गई मशीनों से राष्ट्रीय चुनाव आयोग अनभिज्ञ है ,तो संदेह और भी बढ़ जाता है।

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