Monday, 12 June 2017

कलकत्ता हाईकोर्ट के दलित जज सी एस कर्णन का रिटायरमेंट आज, दीजिए बधाई..

नई दिल्ली। कलकत्ता हाईकोर्ट के दलित जज सी एस कर्णन आज रिटायर हो रहे हैं। मगर वो अपनी फेयरवेल पार्टी में शामिल नहीं होंगे। देश के इतिहास में ये पहला मौका है जब कोई जज अपनी फेयरवेल पार्टी में शामिल नहीं होंगे। अगर वो सामने आते भी हैं तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
कोर्ट सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 12 जून उनके कार्यकाल का आखिरी दिन है। इसके पहले से ही सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना के मामले में सुनवाई करते हुए फैसला सुनाने के उनके प्रशासनिक अधिकारों को छीन लिया है। उन्हें छह महीने जेल की सजा सुनाई गई है, लेकिन नौ मई को इस फैसले के बाद से ही वे गायब हैं।
दरअसल, जस्टिस कर्णन ने मद्रास हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कई जजों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इसके लिए उन्होंने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी थी। सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों की बेंच ने इस सिलसिले में जस्टिस कर्णन की लिखी चिट्ठियों का स्वत: संज्ञान लेते हुए उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना का मुकदमा शुरू किया था। इस सिलसिले में जस्टिस कर्णन 31 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए थे। ऐसा करने वाले वो किसी भी हाई कोर्ट के पहले जज थे। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन को अवमानना के मामले में दोषी करार देते हुए 6 महीने की सजा सुनाई थी।
कोर्ट के इस आदेश के बाद ही जस्टिस कर्णन कोलकाता से अपने गृह प्रदेश तमिलनाडु आ गए थे। उनके पीछे अगले ही दिन पश्चिम बंगाल पुलिस की दो टीमें भी चेन्नई पहुंच गईं थीं। तब से अब तक तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कई ठिकानों में जाकर पुलिस तलाश कर चुकी है लेकिन जस्टिस कर्णन का कोई पता नहीं चल पाया है।
जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को असंवैधानिक बताया था। उन्होंने कहा था, ‘ 8 फरवरी से ये सात जज मुझे कोई भी न्यायिक और प्रशासनिक कार्य नहीं करने दे रहे हैं। इन लोगों ने मुझे परेशान कर दिया है और मेरा सामान्य जीवन खराब कर दिया है। इसलिए, मैं सभी सात न्यायाधीशों से मुआवजे के रूप में 14 करोड़ रुपये लूंगा।’

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