Sunday, 4 June 2017

ऊंचे रसूख के चक्कर में योगी के मंत्री ने किया जनता के 5 करोड़ का नुकसान

लखनऊ। पीएम मोदी अपने 3 साल के कार्यकाल की उपलब्धियों में वीआईपी कल्चर को खत्म करने को भी गिन रहे हैं लेकिन अफसोस की ये भी एक जुमला ही साबित हुआ। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि योगी सरकार में खादी एवं ग्राम्य उद्योग मंत्री सत्यदेव पचौरी ने आज अपने उंचे रसूख के कारण जनता के 5 करोड़ का नुकसान कर दिया है। 

दरअसल, खादी ग्रामोद्योग मंत्री सत्यदेव पचौरी गुरुवार को हरदोई में एक कार्यक्रम के दौरान बेहोश हो गए थे। शाम 7:30 पर उन्हें लोहिया संस्थान में भर्ती करवाया गया। यहां जांच में उनका शुगर लेवल और बीपी लो निकला। शुक्रवार को डॉक्टरों ने उनके सिर का एमआरआई करवाने की सलाह दी। इसके बाद दोपहर 12:30 पर एमआरआई रूम के बाहर पहले बैठे मरीजों को हटा दिया गया।   

डॉक्टर मंत्रीजी को जांच के लिए एमआरआई रूम में ले गए और टेबल पर लिटा दिया। इसके बाद मंत्री का गनर बंदूक लेकर अंदर पहुंच गया, जबकि रूम के दरवाजे पर ही मेटल भीतर न ले जाने की चेतावनी लगी हुई थी। लेकिन गनर ने उसे नजरअंदाज कर दिया। मंत्रीजी का रसूख कहें या अनदेखी पर किसी डॉक्टर ने भी उसे नहीं टोका। जांच के लिए मशीन ऑन होते ही उसमें लगा चुंबक प्रभावी हो गया। बंदूक गनर के हाथ से निकल मशीन में फंस गई और तेज आवाज के साथ मशीन बंद हो गई। इससे मंत्रीजी, डॉक्टर व कर्मचारी घबरा गए। मंत्रीजी हड़बड़ाहट में टेबल से उठे और बाहर भाग गए।

एमआरआई जांच के दौरान तीमारदार को अंदर नहीं आने दिया जाता है। मरीज के पास कोई मेटल का सामान नहीं होना चाहिए। मरीज को अंदर ले जाने से पहले कर्मचारी चेक करते हैं कि उसके पास बेल्ट, मोबाइल समेत कोई भी मेटल और गोल्ड का सामान न हो।

डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में लगे इस एमआरआई मशीन की कीमत पांच करोड़ रुपया है। कल के हादसे के बाद आज कंपनी के इंजीनियर लखनऊ में थे। इन सभी ने मशीन की जांच की। कंपनी के इंजीनियर ने एमआरआइ मशीन को ठीक करने के लिए 52 लाख रुपए का एस्टीमेट संस्थान प्रशासन को सौंपा है। इंजीनियर ने बताया कि मशीन को ठीक होने में कम से कम 15 दिन का समय लगेगा। तब तक लोहिया संस्थान में एमआरआइ का काम नहीं होगा।

एमआरआई मशीन से बंदूक निकालने के लिए उसकी मैग्नेटिक फील्ड डिफ्यूज करनी पड़ेगी। बता दें कि ऐसा इसलिए है क्योंकि मशीन में पोलेराइज्ड मैग्नेटिक फील्ड बनी रहती है। इसके बाद उसमें करीब 25 लीटर से अधिक हीलियम गैस को भी दोबारा निकालकर भरना पड़ेगा जिसमें लाखों का खर्च आने का अनुमान है। 

इस एमआरआई मशीन से रोजाना 30 मरीजों की जांच होती थी जो मंत्री जी की कृपा से अब नहीं हो पाएगी। नए मरीजों को जांच के लिए जुलाई तक की वेटिंग दी जा रही है। ऐसे में मशीन खराब होने से मरीजों को जांच के लिए भटकना होगा। बता दें कि एमआरआई की सुविधा सिर्फ केजीएमयू और लोहिया अस्पताल में ही है।

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