Tuesday, 20 June 2017

किसानों को ‘नीति आयोग’ का घेराव करने को मजबूर कर रहीं BJP की किसान विरोधी नीतियां

लखनऊ। बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने किसानों के मुद्दे पर केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला है। बीएसपी सुप्रीमो ने कहा कि देश के करोड़ों मेहनतकश बेसहारा गरीबों, मजदूरों, किसानों व बेरोजगारों को रोजगार दिलाकर उनके परिवार का पेट भरने के बजाय मोदी सरकार सरकारी धन व संसाधन का इस्तेमाल पेट भरे लोगों पर ही ज्यादा केन्द्रित कर रही है, जो सर्वथा अनुचित है। उन्होंने कहा मोदी सरकार के गरीब व किसान-विरोधी नीति व कार्यक्रम के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन उचित और स्वाभाविक है।
मायावती ने कहा कि वैसे भी देश के ग़रीब, मज़दूर व अन्य मेहनतकश लोगों को हर दिन मेहनत-मजदूरी की तलाश करके अपना पेट पालने से ही फुर्सत नहीं है। इसके बाद सरकार की गलत नीतियों से किसान की समस्या गहराती जा रही है और उस कारण किसान आत्महत्या कर रहे हैं। जो दिन-प्रतिदिन सरकार की गलत नीतियों व कार्यकलापों के कारण लगातार बढ़ता ही जा रहा है। जिसकी तरफ सरकार का ध्यान आकृष्ठ करने के लिये अब शान्ति प्रिय किसान अगले महीने दिल्ली में ’नीति आयोग’ का घेराव करने व जन्तर-मन्तर पर धरना देने जा रहे हैं।
मायावती ने कहा रोजगार की समस्या के अलावा अब तो आईटी सेक्टर में भी बड़े पैमाने पर छंटनी व बेरोजगारी की बड़ी समस्या देश के लोगों को सताने लगी है। यह सब बीजेपी सरकार के दौरान ’रोजगार-बिना विकास’ अर्थात रोजगार का सृजन नहीं कर पाने वाले विकास का ही दुष्परिणाम माना जा रहा है।
इतना ही नहीं बल्कि बीजेपी सरकार में ’रोजगार-बिना विकास’ होने के कारण देश में रोजगार के अवसर अन्य क्षेत्रों में भी लगातार कम होते जा रहे हैं, परन्तु संकट के ऐसे गंभीर समय में भी बीजेपी की केन्द्र व राज्य सरकारें लापरवाह होकर केवल ’योग’ जैसे कार्यक्रमों पर सरकारी धन, संसाधन व समय खर्च कर रही हैं, जबकि ऐसे लोक कार्यक्रमों के लिये बीजेपी सरकार को नहीं बल्कि आरएसएस जैसी संस्थाओं को उत्तरदायी बनाया जाना चाहिये।
बीएसपी सुप्रीमो ने कहा आखिर आरएसएस को मिलने वाली अनेकों प्रकार की सरकारी सुविधायें व छूट का लाभ समाज के सही निर्माण के कार्य में करने के बजाय केवल नफरत की बीज बोने की इजाजत क्यों दी जानी चाहिये?

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